शर्मनाक दिन तानसेन समारोह का स्थान परिवर्तित कर उसे राजमहल परिसर में आयोजित किया गया जबकि तानसेन को सच्ची श्रधांजलि सिर्फ वहीँ हो सकती हे जहाँ उनकी रूह है | कई श्रोता भी इस बात से रुष्ट दिखाई दिए और कुछ बहुत आहात और हद तो तब और हो गई जब उदघाटन अवसर पर मध्यप्रदेश के संस्कृति मंत्री कहते हैं तानसेन खयाल गायकी के उस्ताद थे, वित्त मंत्री कहते हैं ग्वालियर ,संगीत और कालिदास का गहरा सम्बन्ध है ! ये हैं हमारे नेता ................

