सामने है खामोश कैनवास और मेरे अन्दर मचलते कई रंग और उन रंगों में लिप्त कई आकार
यूँ लगता है जैसे कुछ कहना चाहती है उस कैनवास की ख़ामोशी वो मुझसे बात करना चाहता है
और मै उससे................ क्यूँ वो कह नहीं पाता वो सब जो कहना चाहता है, मै जानता हूँ जिस तरह मेरे अन्दर कई रंग और आकार बेचैन हैं कैनवास पर आने को ऐसा ही कुछ वहां भी है उसकी ख़ामोशी में.................
यूँ लगता है जैसे कुछ कहना चाहती है उस कैनवास की ख़ामोशी वो मुझसे बात करना चाहता है
और मै उससे................ क्यूँ वो कह नहीं पाता वो सब जो कहना चाहता है, मै जानता हूँ जिस तरह मेरे अन्दर कई रंग और आकार बेचैन हैं कैनवास पर आने को ऐसा ही कुछ वहां भी है उसकी ख़ामोशी में.................

It nice to see but unable to understand for those who does not belong to art field thoroughly. So it will be better if you explain what you make and thought behind it next time.. And whatever you made is fantastic anyways...
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